अध्याय 5: संज्ञा (Noun) – परिभाषा, भेद और उदाहरण
हिंदी व्याकरण में ‘विकारी शब्दों’ के अंतर्गत सबसे पहला और महत्वपूर्ण भाग संज्ञा है। संसार में ऐसी कोई वस्तु, व्यक्ति या स्थान नहीं है जिसका कोई नाम न हो। व्याकरण की दृष्टि से इसी ‘नाम’ को संज्ञा कहा जाता है। बिना संज्ञा के भाषा अधूरी है क्योंकि हम बिना नाम लिए किसी के बारे में बात नहीं कर सकते।
1. संज्ञा की परिभाषा
किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी, गुण, दोष, भाव या अवस्था के नाम को संज्ञा कहते हैं। सरल शब्दों में, नाम का ही दूसरा नाम संज्ञा है।
– व्यक्ति: राम, महात्मा गांधी, सचिन तेंदुलकर।
– वस्तु: मेज, कलम, मोबाइल, पुस्तक।
– स्थान: दिल्ली, मुंबई, स्कूल, बाजार।
– भाव/अवस्था: मिठास, बुढ़ापा, ईमानदारी, क्रोध।
2. संज्ञा के भेद (Types of Noun)
हिंदी व्याकरण के अनुसार संज्ञा के मुख्य रूप से तीन भेद माने जाते हैं, परंतु अंग्रेजी व्याकरण के प्रभाव के कारण अब इसके पाँच भेदों का अध्ययन किया जाता है:
(क) व्यक्तिवाचक संज्ञा (Proper Noun)
जिस संज्ञा शब्द से किसी विशेष व्यक्ति, विशेष वस्तु या विशेष स्थान का बोध हो, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं। यह हमेशा एकवचन में होती है।
जैसे: हिमालय (विशेष पर्वत), गंगा (विशेष नदी), भारत (विशेष देश), राम (विशेष व्यक्ति)।
(ख) जातिवाचक संज्ञा (Common Noun)
जिस संज्ञा शब्द से उसकी पूरी जाति या श्रेणी का बोध हो, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे: लड़का (सभी लड़कों के लिए), पर्वत (सभी पर्वतों के लिए), नदी (सभी नदियों के लिए), नगर (सभी शहरों के लिए)।
(ग) भाववाचक संज्ञा (Abstract Noun)
जिन शब्दों से किसी प्राणी या वस्तु के गुण, दोष, दशा, स्वभाव या मन के भाव का बोध हो, उन्हें भाववाचक संज्ञा कहते हैं। इन्हें केवल अनुभव किया जा सकता है, देखा या स्पर्श नहीं किया जा सकता।
जैसे: बचपन, प्रेम, घृणा, शत्रुता, ऊँचाई, थकावट।
(घ) द्रव्यवाचक संज्ञा (Material Noun)
जिन संज्ञा शब्दों से किसी द्रव्य, पदार्थ या धातु का बोध हो, उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं। इन्हें मापा या तोला जा सकता है, गिना नहीं जा सकता।
जैसे: सोना, चाँदी, तेल, पानी, दूध, कोयला, घी।
(ङ) समूहवाचक संज्ञा (Collective Noun)
जिन संज्ञा शब्दों से किसी समूह या समुदाय का बोध हो, उन्हें समूहवाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे: कक्षा, सेना, भीड़, गुच्छा, सभा, परिवार।
3. भाववाचक संज्ञाओं का निर्माण
भाववाचक संज्ञाएँ मुख्य रूप से पाँच प्रकार से बनाई जा सकती हैं:
- जातिवाचक संज्ञा से: बच्चा → बचपन, मित्र → मित्रता।
- सर्वनाम से: अपना → अपनापन, निज → निजत्व।
- विशेषण से: मीठा → मिठास, सुंदर → सुंदरता।
- क्रिया से: थकना → थकावट, पढ़ना → पढ़ाई।
- अव्यय से: निकट → निकटता, दूर → दूरी।
अभ्यास प्रश्नावली – संज्ञा (15 महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर)
उत्तर: व्यक्तिवाचक संज्ञा किसी विशेष (Specific) नाम का बोध कराती है, जबकि जातिवाचक संज्ञा उस पूरी श्रेणी (Category) का बोध कराती है। उदाहरण के लिए ‘गंगा’ व्यक्तिवाचक संज्ञा है क्योंकि वह एक विशेष नदी है, लेकिन ‘नदी’ जातिवाचक संज्ञा है क्योंकि वह दुनिया की सभी नदियों के लिए प्रयोग किया जा सकता है।
उत्तर: भाववाचक संज्ञाएँ अमूर्त (Abstract) होती हैं। इन्हें हम आँखों से देख नहीं सकते और न ही हाथों से छू सकते हैं। इन्हें केवल हृदय से अनुभव किया जा सकता है। जैसे ‘ईमानदारी’ एक गुण है जिसे महसूस किया जा सकता है, उसे भौतिक रूप में देखा नहीं जा सकता।
उत्तर: हाँ, जब कोई जातिवाचक शब्द किसी विशेष व्यक्ति के लिए रूढ़ हो जाता है। जैसे: “पंडित जी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे।” यहाँ ‘पंडित’ एक जाति है, लेकिन इस वाक्य में यह केवल ‘जवाहरलाल नेहरू’ के लिए प्रयोग हुआ है, इसलिए यहाँ यह व्यक्तिवाचक संज्ञा है।
उत्तर: द्रव्यवाचक संज्ञा के उदाहरण: 1. लोहा, 2. पीतल, 3. ऑक्सीजन, 4. पेट्रोल, 5. चीनी। इन सभी को तौला या मापा जाता है।
उत्तर: वे शब्द जो किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे समूह (Group) का बोध कराते हैं, समूहवाचक संज्ञा कहलाते हैं। जैसे ‘सेना’ शब्द कहते ही सैनिकों के समूह का चित्र उभरता है, न कि किसी एक सैनिक का।
उत्तर: ‘मीठा’ एक विशेषण है जो किसी वस्तु की विशेषता बताता है (जैसे: मीठा फल)। जबकि ‘मिठास’ एक भाववाचक संज्ञा है जो उस फल के अंदर के गुण या भाव का बोध कराती है।
उत्तर: जब व्यक्तिवाचक संज्ञा किसी व्यक्ति विशेष का नाम न रहकर उस जैसे गुणों वाले अनेक व्यक्तियों का बोध कराने लगे। जैसे: “आज के युग में भी हरिश्चंद्रों की कमी नहीं है।” यहाँ ‘हरिश्चंद्र’ सत्यवादी व्यक्तियों की श्रेणी का बोध करा रहा है, इसलिए यह जातिवाचक की तरह प्रयुक्त हुआ है।
उत्तर: भाववाचक संज्ञा बनाने के लिए शब्दों के अंत में प्रायः ता, त्व, पन, आवट, आहट, ई, आस जैसे प्रत्यय जोड़े जाते हैं। जैसे: लघु + ता = लघुता, अपना + पन = अपनापन, मुस्कराना + आहट = मुस्कराहट।
उत्तर: ‘पानी’ और ‘दूध’ को द्रव्यवाचक संज्ञा में रखा जाता है क्योंकि ये तरल पदार्थ हैं और इन्हें गिना नहीं जा सकता, केवल मापा जा सकता है। आधुनिक व्याकरण में इन्हें जातिवाचक संज्ञा के अंतर्गत भी माना जाता है।
उत्तर: संज्ञा को विकारी शब्द इसलिए कहा जाता है क्योंकि लिंग, वचन और कारक के प्रभाव से संज्ञा शब्दों के रूप बदल जाते हैं। जैसे: लड़का (एकवचन) → लड़के (बहुवचन), लड़का (पुल्लिंग) → लड़की (स्त्रीलिंग)।
उत्तर: 1. लिखना (क्रिया) → लिखावट (भाववाचक संज्ञा), 2. दौड़ना (क्रिया) → दौड़ (भाववाचक संज्ञा)।
उत्तर: ‘भीड़’ और ‘कक्षा’ समूहवाचक संज्ञाएँ हैं क्योंकि ये व्यक्तियों और छात्रों के समूह का बोध कराती हैं।
उत्तर: सर्वनाम शब्दों में प्रत्यय जोड़कर भाववाचक संज्ञा बनाई जाती है। जैसे: ‘अहं’ से ‘अहंकार’ और ‘स्व’ से ‘स्वत्व’।
उत्तर: अर्थ की दृष्टि से संज्ञा के पाँच भेद हैं: व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक, द्रव्यवाचक और समूहवाचक। प्राचीन व्याकरण के अनुसार मुख्य तीन ही भेद हैं।
उत्तर: संज्ञा वाक्य का आधार होती है। बिना संज्ञा (या सर्वनाम) के वाक्य में कर्ता या कर्म का होना असंभव है। संज्ञा ही वह तत्व है जिसके बारे में वाक्य में कुछ कहा जाता है या जो क्रिया को संपादित करता है।