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अध्याय 8: क्रिया (Verb) – परिभाषा, भेद और प्रयोग

हिंदी व्याकरण में ‘क्रिया’ वह तत्व है जिसके बिना किसी भी वाक्य की कल्पना नहीं की जा सकती। क्रिया ही वह शब्द है जो हमें बताता है कि वाक्य में क्या हो रहा है। संज्ञा और सर्वनाम द्वारा किए गए कार्यों का बोध क्रिया ही कराती है।

1. क्रिया की परिभाषा और धातु (Root)

जिस शब्द से किसी कार्य के होने या किए जाने का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं। क्रिया के मूल रूप को ‘धातु’ कहा जाता है। धातु में ‘ना’ प्रत्यय जोड़ने से क्रिया का सामान्य रूप बनता है।

उदाहरण:
धातु: पढ़, लिख, जा, खा, सो।
सामान्य रूप: पढ़ना, लिखना, जाना, खाना, सोना।
वाक्य: मोहन पुस्तक पढ़ता है। (यहाँ ‘पढ़ता’ क्रिया है)।

2. क्रिया के भेद (कर्म के आधार पर)

कर्म की उपस्थिति और अनुपस्थिति के आधार पर क्रिया के दो मुख्य भेद होते हैं:

(क) अकर्मक क्रिया (Intransitive Verb)

जिस क्रिया का फल सीधे कर्ता (Subject) पर पड़ता है और जिसमें कर्म (Object) की आवश्यकता नहीं होती, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं।
जैसे: बच्चा रोता है, पंछी उड़ते हैं, राम सोता है।

(ख) सकर्मक क्रिया (Transitive Verb)

जिस क्रिया के कार्य का फल कर्ता को छोड़कर कर्म पर पड़ता है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं। इसके दो उपभेद हैं:

  • एककर्मक क्रिया: जिसमें केवल एक कर्म हो (जैसे: राम आम खाता है)।
  • द्विकर्मक क्रिया: जिसमें दो कर्म हों (जैसे: अध्यापक छात्रों को गणित पढ़ाते हैं—छात्र और गणित यहाँ दो कर्म हैं)।

3. संरचना या प्रयोग के आधार पर क्रिया के भेद

वाक्य में क्रिया का प्रयोग किस प्रकार हुआ है, इस आधार पर भी इसके कुछ महत्वपूर्ण भेद हैं:

  1. संयुक्त क्रिया: जब दो या दो से अधिक क्रियाएं मिलकर एक पूर्ण क्रिया बनाती हैं (जैसे: वह घर पहुँच गया)।
  2. प्रेरणार्थक क्रिया: जब कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे को कार्य करने की प्रेरणा दे (जैसे: लिखवाना, पढ़वाना, नहलाना)।
  3. नामधातु क्रिया: जो क्रियाएं संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण से बनती हैं (जैसे: लात से लतियाना, बात से बतियाना)।
  4. पूर्वकालिक क्रिया: मुख्य क्रिया से पहले होने वाली क्रिया (जैसे: वह पढ़कर सो गया—यहाँ ‘पढ़कर’ पूर्वकालिक क्रिया है)।

4. क्रिया का रूपांतरण

क्रिया एक विकारी शब्द है, जिसका रूप कर्ता के लिंग, वचन और काल के अनुसार बदल जाता है।

आधार परिवर्तन का उदाहरण
लिंग लड़का जाता है / लड़की जाती है
वचन लड़का खेलता है / लड़के खेलते हैं
काल वह गया / वह जाएगा / वह जा रहा है

अभ्यास प्रश्नावली – क्रिया (15 महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर)

प्रश्न 1: क्रिया और धातु में क्या संबंध है?

उत्तर: क्रिया का निर्माण धातु से ही होता है। धातु क्रिया का मूल रूप है (जैसे: ‘खा’)। जब इसमें ‘ना’ प्रत्यय जुड़ता है तो वह क्रिया का सामान्य रूप ‘खाना’ बन जाता है। धातु के बिना क्रिया का अस्तित्व संभव नहीं है।

प्रश्न 2: अकर्मक और सकर्मक क्रिया की पहचान कैसे करें?

उत्तर: क्रिया के साथ ‘क्या’ या ‘किसको’ प्रश्न पूछने पर यदि उत्तर मिले तो वह सकर्मक क्रिया है, और यदि उत्तर न मिले तो वह अकर्मक क्रिया है। उदाहरण: ‘राम खाता है’—क्या खाता है? (आम)—सकर्मक। ‘राम सोता है’—क्या सोता है? (कोई उत्तर नहीं)—अकर्मक।

प्रश्न 3: द्विकर्मक क्रिया का एक स्पष्ट उदाहरण दीजिए।

उत्तर: “माँ ने बच्चे को दूध पिलाया।” इस वाक्य में ‘बच्चे’ (सजीव कर्म) और ‘दूध’ (निर्जीव कर्म) दो कर्म हैं, इसलिए ‘पिलाया’ यहाँ द्विकर्मक क्रिया है।

प्रश्न 4: प्रेरणार्थक क्रिया के कितने रूप होते हैं?

उत्तर: इसके दो रूप होते हैं: 1. प्रथम प्रेरणार्थक (जैसे: मां बच्चे को सुलाती है) और 2. द्वितीय प्रेरणार्थक (जैसे: मां नौकर से बच्चे को सुलवाती है)।

प्रश्न 5: नामधातु क्रिया कैसे बनाई जाती है?

उत्तर: नामधातु क्रिया संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण में प्रत्यय लगाकर बनाई जाती है। जैसे: हाथ (संज्ञा) से हथियाना, अपना (सर्वनाम) से अपनाना, गरम (विशेषण) से गरमाना।

प्रश्न 6: पूर्वकालिक क्रिया की पहचान क्या है?

उत्तर: जब वाक्य में दो क्रियाएं हों और एक क्रिया दूसरी से पहले समाप्त हो चुकी हो, तो पहली क्रिया पूर्वकालिक होती है। इसकी पहचान ‘कर’ शब्द से होती है। जैसे: ‘खाकर’, ‘पीकर’, ‘देखकर’।

प्रश्न 7: संयुक्त क्रिया किसे कहते हैं?

उत्तर: जब दो क्रियाएं मिलकर एक ही कार्य को पूरा करती हैं। जैसे: “वह छत से कूद पड़ा।” यहाँ ‘कूदना’ और ‘पड़ना’ दो क्रियाएं हैं लेकिन अर्थ एक ही निकल रहा है।

प्रश्न 8: सहायक क्रिया (Helping Verb) का क्या कार्य है?

उत्तर: सहायक क्रिया मुख्य क्रिया के साथ मिलकर काल (Time) का बोध कराती है और वाक्य को पूर्ण करती है। जैसे: “मैं पढ़ रहा हूँ।” यहाँ ‘हूँ’ सहायक क्रिया है।

प्रश्न 9: ‘हँसना’ और ‘जागना’ किस प्रकार की क्रियाएं हैं?

उत्तर: ये अकर्मक क्रियाएं हैं क्योंकि इनका फल कर्ता पर पड़ता है और इनके लिए कर्म की आवश्यकता नहीं होती।

प्रश्न 10: क्या क्रिया के बिना वाक्य पूरा हो सकता है?

उत्तर: व्याकरणिक रूप से नहीं। क्रिया वाक्य का हृदय है। कभी-कभी क्रिया छिपी हो सकती है (जैसे उत्तर देते समय), लेकिन अर्थ पूर्ण करने के लिए क्रिया का होना अनिवार्य है।

प्रश्न 11: ‘पढ़ना’ क्रिया का प्रेरणार्थक रूप क्या होगा?

उत्तर: पढ़ना का प्रथम प्रेरणार्थक ‘पढ़ाना’ और द्वितीय प्रेरणार्थक ‘पढ़वाना’ होगा।

प्रश्न 12: सम्मिश्र क्रिया (Compound Verb) क्या है?

उत्तर: जब संज्ञा या विशेषण के बाद ‘करना’, ‘होना’, ‘देना’ जैसी क्रियाएं जुड़ती हैं। जैसे: काम + करना = काम करना, विदा + करना = विदा करना।

प्रश्न 13: सजातीय क्रिया किसे कहते हैं?

उत्तर: जहाँ कर्म और क्रिया दोनों एक ही धातु से बने हों। जैसे: “भारत ने लड़ाई लड़ी।” यहाँ ‘लड़ाई’ (कर्म) और ‘लड़ी’ (क्रिया) दोनों ‘लड़’ धातु से बने हैं।

प्रश्न 14: क्रिया का लिंग किसके अनुसार निर्धारित होता है?

उत्तर: साधारण वाक्यों (कर्तृवाच्य) में क्रिया का लिंग कर्ता के अनुसार होता है, लेकिन कर्मवाच्य में यह कर्म के अनुसार बदल जाता है।

प्रश्न 15: मुख्य क्रिया और रंजक क्रिया में क्या अंतर है?

उत्तर: मुख्य क्रिया अर्थ प्रदान करती है, जबकि रंजक क्रिया मुख्य क्रिया के अर्थ में विशेषता या प्रभाव पैदा करती है। जैसे: “वह रो पड़ा।” यहाँ ‘रोना’ मुख्य है और ‘पड़ना’ रंजक क्रिया है।