अध्याय 6: सर्वनाम (Pronoun) – परिभाषा, भेद और प्रयोग
हिंदी व्याकरण में संज्ञा के दोहराव को रोकने और भाषा को सुंदर व संक्षिप्त बनाने के लिए जिस शब्द का प्रयोग किया जाता है, उसे सर्वनाम कहते हैं। ‘सर्वनाम’ का शाब्दिक अर्थ है—’सबका नाम’। यह वे शब्द हैं जो किसी एक के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए प्रयोग किए जा सकते हैं।
1. सर्वनाम की परिभाषा
संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्दों को सर्वनाम कहा जाता है। सर्वनाम संज्ञा की पुनरावृत्ति (Repetition) को रोकता है, जिससे वाक्य पढ़ने और सुनने में अरुचिकर नहीं लगता।
– बिना सर्वनाम के: राम स्कूल जाता है, राम वहाँ पढ़ता है, राम का घर सुंदर है। (अटपटा लगता है)
– सर्वनाम के साथ: राम स्कूल जाता है, वह वहाँ पढ़ता है, उसका घर सुंदर है। (यह सही है)
2. सर्वनाम के भेद (Types of Pronoun)
हिंदी व्याकरण में सर्वनाम के मुख्य रूप से 6 भेद होते हैं:
(क) पुरुषवाचक सर्वनाम (Personal Pronoun)
जो सर्वनाम शब्द बोलने वाले (वक्ता), सुनने वाले (श्रोता) या किसी अन्य व्यक्ति के लिए प्रयोग किए जाते हैं। इसके तीन उपभेद हैं:
- उत्तम पुरुष: बोलने वाला अपने लिए प्रयोग करता है (मैं, हम)।
- मध्यम पुरुष: सुनने वाले के लिए प्रयोग होता है (तू, तुम, आप)।
- अन्य पुरुष: किसी तीसरे व्यक्ति के लिए प्रयोग होता है (वह, वे)।
(ख) निश्चयवाचक सर्वनाम (Demonstrative Pronoun)
जो सर्वनाम किसी निश्चित वस्तु या व्यक्ति की ओर संकेत करते हैं।
जैसे: यह मेरी पुस्तक है, वे कल आएंगे।
(ग) अनिश्चयवाचक सर्वनाम (Indefinite Pronoun)
जिन सर्वनाम शब्दों से किसी निश्चित व्यक्ति या वस्तु का बोध नहीं होता।
जैसे: बाहर कोई खड़ा है, दाल में कुछ गिर गया है।
(घ) प्रश्नवाचक सर्वनाम (Interrogative Pronoun)
जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग प्रश्न पूछने के लिए किया जाता है।
जैसे: वहाँ कौन है? तुम क्या लाए हो?
(ङ) संबंधवाचक सर्वनाम (Relative Pronoun)
जो सर्वनाम शब्द वाक्य में आए दूसरे संज्ञा या सर्वनाम शब्दों से संबंध बताते हैं।
जैसे: जो मेहनत करेगा, वह फल पाएगा। जैसा करोगे, वैसा भरोगे।
(च) निजवाचक सर्वनाम (Reflexive Pronoun)
जिन सर्वनामों का प्रयोग कर्ता (Subject) स्वयं अपने लिए करता है।
जैसे: मैं यह काम अपने आप कर लूँगा। वह स्वयं चला जाएगा।
3. सर्वनाम का रूपांतरण
सर्वनाम शब्दों पर लिंग का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। वह ‘जाता है’ और ‘जाती है’ दोनों में ‘वह’ ही रहता है। परंतु वचन और कारक के अनुसार इनके रूप बदल जाते हैं।
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्ता | मैं / मैंने | हम / हमने |
| कर्म | मुझे / मुझको | हमें / हमको |
| संबंध | मेरा / मेरी | हमारा / हमारी |
अभ्यास प्रश्नावली – सर्वनाम (15 महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर)
उत्तर: भाषा को सुगम, संक्षिप्त और प्रभावशाली बनाने के लिए सर्वनाम की आवश्यकता होती है। यदि सर्वनाम न हो, तो हमें बार-बार संज्ञा शब्दों को दोहराना पड़ेगा (जैसे- मोहन ने कहा कि मोहन मोहन की माँ से मिलेगा), जो भाषा के प्रवाह को बाधित करता है और सुनने में अरुचिकर लगता है।
उत्तर: 1. उत्तम पुरुष: वक्ता अपने लिए (मैं पढ़ता हूँ)। 2. मध्यम पुरुष: श्रोता के लिए (तुम कहाँ जा रहे हो?)। 3. अन्य पुरुष: किसी तीसरे के लिए जिसके बारे में बात हो रही हो (वे खेल रहे हैं)।
उत्तर: जब ‘आप’ का प्रयोग आदर देने के लिए सामने वाले व्यक्ति के लिए हो, तो वह मध्यम पुरुष है (जैसे: आप बैठिए)। लेकिन जब ‘आप’ का प्रयोग कर्ता स्वयं के लिए ‘अपने आप’ के अर्थ में करे, तो वह निजवाचक है (जैसे: मैं आप ही चला जाऊँगा)।
उत्तर: निश्चयवाचक सर्वनाम किसी निश्चित वस्तु की ओर पक्का संकेत करता है (जैसे: यह मेरा घर है)। अनिश्चयवाचक सर्वनाम में वस्तु या व्यक्ति का ज्ञान निश्चित नहीं होता (जैसे: कोई बुला रहा है), यहाँ यह पता नहीं कि बुलाने वाला कौन है।
उत्तर: ‘कौन’ का प्रयोग प्रायः सजीव प्राणियों (व्यक्तियों) के लिए किया जाता है (जैसे: दरवाजे पर कौन है?)। ‘क्या’ का प्रयोग प्रायः निर्जीव वस्तुओं या भावों के लिए किया जाता है (जैसे: तुम्हारे हाथ में क्या है?)।
उत्तर: 1. जो – सो (जो जागेगा, सो पावेगा)। 2. जैसा – वैसा (जैसा देश, वैसा भेष)। ये शब्द एक वाक्य का दूसरे वाक्य से संबंध जोड़ते हैं।
उत्तर: नहीं, सर्वनाम शब्दों का रूप लिंग के आधार पर नहीं बदलता। क्रिया के माध्यम से ही लिंग का पता चलता है। उदाहरण: ‘वह खेल रहा है’ (पुल्लिंग) और ‘वह खेल रही है’ (स्त्रीलिंग)। दोनों वाक्यों में ‘वह’ समान है।
उत्तर: सर्वनाम शब्दों में ‘सम्बोधन कारक’ (हे, अरे) नहीं होता। हम सर्वनाम को पुकार नहीं सकते, संबोधन केवल संज्ञा का ही होता है।
उत्तर: उदाहरण: “मुझे खाने के लिए कुछ दे दो।” यहाँ ‘कुछ’ शब्द भोजन की किसी वस्तु की ओर संकेत कर रहा है, लेकिन वह वस्तु क्या है, यह निश्चित नहीं है।
उत्तर: ‘मैं’ एकवचन है और इसका बहुवचन रूप ‘हम’ होता है। कारक चिन्हों के साथ यह ‘हमने’, ‘हमें’, ‘हमारा’ आदि में बदल जाता है।
उत्तर: वाक्य: “सफलता पाने के लिए हमें स्वयं मेहनत करनी होगी।” यहाँ ‘स्वयं’ कर्ता द्वारा अपने लिए प्रयुक्त हुआ है।
उत्तर: जब ‘वह’ किसी अनुपस्थित व्यक्ति के लिए आए, तो वह अन्य पुरुष है (जैसे: वह बीमार है)। जब ‘वह’ किसी वस्तु की ओर संकेत करे, तो वह निश्चयवाचक है (जैसे: वह मेरी कार है)।
उत्तर: सर्वनाम के 11 मूल रूप माने गए हैं: मैं, तू, आप, यह, वह, जो, सो, कोई, कुछ, कौन, क्या।
उत्तर: इसमें ‘संबंधवाचक सर्वनाम’ का आभास होता है क्योंकि ‘जहाँ’ और ‘वहाँ’ स्थानवाचक संबंधों को दर्शा रहे हैं।
उत्तर: सर्वनाम का पद परिचय देते समय सर्वनाम का भेद, पुरुष (यदि पुरुषवाचक हो), लिंग, वचन, कारक और क्रिया के साथ उसके संबंध का उल्लेख करना चाहिए।