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अध्याय 10: समय और कार्य (Time and Work)

अध्याय 10: समय और कार्य (Time and Work) – पूर्ण मार्गदर्शिका

“कार्यक्षमता और समय के बीच के संतुलन को समझने की कला”

समय और कार्य का अध्याय इस बुनियादी सिद्धांत पर आधारित है कि किसी कार्य को पूरा करने में लगने वाला समय, उस व्यक्ति की कार्यक्षमता (Efficiency) के व्युत्क्रमानुपाती (Inversely Proportional) होता है। सरल शब्दों में, यदि आपकी काम करने की गति तेज है, तो आपको समय कम लगेगा। इस अध्याय के सवाल अक्सर मजदूरों की संख्या, दिनों की संख्या और काम के घंटों के इर्द-गिर्द घूमते हैं।


खंड 1: बुनियादी सिद्धांत और कार्यक्षमता

सवालों को हल करने के लिए दो मुख्य बातें याद रखनी चाहिए:

  • 1 दिन का काम: यदि कोई व्यक्ति किसी काम को ‘n’ दिनों में पूरा करता है, तो उसका 1 दिन का काम 1/n हिस्सा होगा।
  • कार्यक्षमता (Efficiency): यदि A, B से दुगुना तेज काम करता है, तो A को B की तुलना में आधा समय लगेगा।
  • कुल काम (Total Work): गणना को आसान बनाने के लिए हम ‘दिनों का लसवि (L.C.M.)’ लेकर उसे कुल काम मान लेते हैं।

खंड 2: महत्वपूर्ण सूत्र (Essential Formulas)

1. एम.डी.एच. (MDH) मसाला ट्रिक:

यह सबसे शक्तिशाली सूत्र है जो मजदूरों, दिनों और घंटों के संबंधों को जोड़ता है।

(M₁ × D₁ × H₁) / W₁ = (M₂ × D₂ × H₂) / W₂

जहाँ M = आदमी, D = दिन, H = घंटे और W = कार्य (Work)।

2. मिलकर काम करना:

यदि A किसी काम को ‘x’ दिनों में और B उसे ‘y’ दिनों में करता है, तो दोनों मिलकर उसे:

समय = (x × y) / (x + y) दिनों में पूरा करेंगे।


खंड 3: प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्वपूर्ण प्रश्न और समाधान

प्रश्न 1: A किसी काम को 10 दिन में और B उसी काम को 15 दिन में पूरा करता है। दोनों मिलकर उस काम को कितने दिन में करेंगे?

समाधान (लसवि विधि – Best Trick):

Step 1: 10 और 15 का लसवि (LCM) निकालें = 30. (माना कुल काम 30 यूनिट है)

Step 2: A की कार्यक्षमता = 30 / 10 = 3 यूनिट/दिन।

Step 3: B की कार्यक्षमता = 30 / 15 = 2 यूनिट/दिन।

Step 4: दोनों की कुल क्षमता = 3 + 2 = 5 यूनिट/दिन।

Step 5: कुल समय = 30 / 5 = 6 दिन।

उत्तर: 6 दिन

प्रश्न 2: 12 आदमी 8 घंटे प्रतिदिन काम करके एक काम को 10 दिन में पूरा करते हैं। तो 15 आदमी 4 घंटे प्रतिदिन काम करके उसे कितने दिन में पूरा करेंगे?

समाधान (MDH Trick):

M₁=12, D₁=10, H₁=8

M₂=15, D₂=?, H₂=4

(12 × 10 × 8) = (15 × D₂ × 4)

960 = 60 × D₂

D₂ = 960 / 60 = 16 दिन।

उत्तर: 16 दिन

प्रश्न 3: A और B मिलकर किसी काम को 12 दिन में करते हैं। A अकेला उसे 20 दिन में कर सकता है। B अकेला उसे कितने दिन में करेगा?

समाधान:

लसवि (12, 20) = 60 यूनिट।

(A + B) की क्षमता = 60 / 12 = 5.

A की क्षमता = 60 / 20 = 3.

B की क्षमता = 5 – 3 = 2.

B का समय = 60 / 2 = 30 दिन।

उत्तर: 30 दिन


खंड 4: विशेष प्रकार के प्रश्न और शॉर्टकट

1. काम छोड़कर जाने वाले प्रश्न:

यदि A काम खत्म होने से 2 दिन पहले छोड़ दे, तो उसके 2 दिन के काम को ‘कुल काम’ में जोड़ दें और फिर सबकी क्षमता से भाग दें।

2. बारी-बारी से काम करना (Alternative Days):

इसमें पहले जोड़े (Pair) का काम निकालें। जैसे A पहले दिन, B दूसरे दिन। 2 दिन का काम = (A+B की क्षमता)। फिर कुल काम के पास पहुँचने के लिए गुणा करें।

3. पुरुष, महिला और बच्चे (And/Or वाले सवाल):

इनमें सबसे पहले उनकी कार्यक्षमता का अनुपात (जैसे 1 पुरुष = 2 महिला) निकालना जरूरी होता है। इसके बाद पूरे सवाल को किसी एक यूनिट (या तो पुरुष या महिला) में बदलकर MDH सूत्र लगाएं।


खंड 5: मोबाइल यूजर्स के लिए “स्मार्ट रिवीज़न” नोट्स

  • लसवि (LCM) ही चाबी है: कार्यक्षमता निकालने के लिए हमेशा दिनों का लसवि लें, इससे गणना आसान हो जाती है।
  • काम और मजदूरी: मजदूरी (Money) हमेशा ‘दिनों’ के अनुपात में नहीं, बल्कि ‘कार्यक्षमता’ या ‘किए गए काम’ के अनुपात में बांटी जाती है।
  • नकारात्मक कार्य: पाइप और टंकी (अगला अध्याय) में पानी निकालने वाले पाइप को ‘नकारात्मक कार्यक्षमता’ (-ve efficiency) माना जाता है।

स्वयं अभ्यास हेतु प्रश्न (Practice Set)

  1. A की कार्यक्षमता B से तिगुनी है। यदि A किसी काम को B से 20 दिन कम में करता है, तो B अकेला उसे कितने दिन में करेगा?
  2. 8 पुरुष या 12 महिलाएँ एक काम को 25 दिन में पूरा करते हैं। 6 पुरुष और 11 महिलाएँ उसे कितने दिन में करेंगे?
  3. A और B एक काम को क्रमशः 10 और 15 दिन में करते हैं। दोनों ने साथ काम शुरू किया लेकिन 2 दिन बाद A ने काम छोड़ दिया। शेष काम B कितने दिन में करेगा?
  4. एक किले में 500 सैनिकों के लिए 30 दिन का भोजन था। 6 दिन बाद 100 सैनिक और आ गए। शेष भोजन कितने दिन चलेगा?

— समय और कार्य का अध्याय यहाँ समाप्त होता है। अगला लक्ष्य: पाइप और टंकी (Pipes and Cisterns) का अभ्यास करें। —

अध्याय 9: चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest)

अध्याय 9: चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) – विस्तृत मार्गदर्शिका

“ब्याज पर ब्याज: धन वृद्धि का सबसे शक्तिशाली गणितीय नियम”

चक्रवृद्धि ब्याज वह ब्याज है जो केवल मूलधन पर ही नहीं, बल्कि पिछले वर्षों के संचित ब्याज पर भी लगता है। सरल शब्दों में, जब पहले वर्ष का ब्याज मूलधन में जुड़ जाता है और अगले वर्ष उस नए मिश्रधन पर ब्याज लगता है, तो उसे चक्रवृद्धि ब्याज कहते हैं। यही कारण है कि इसमें पैसा साधारण ब्याज की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ता है।


खंड 1: महत्वपूर्ण पारिभाषिक शब्दावली

  • मूलधन (P): निवेश की गई शुरुआती राशि।
  • दर (R): ब्याज की वार्षिक प्रतिशत दर।
  • समय (n या T): वह अवधि जिसके लिए पैसा निवेश किया गया है।
  • मिश्रधन (A): मूलधन और चक्रवृद्धि ब्याज का कुल योग।
  • संयोजन (Compounding): ब्याज कितनी बार जोड़ा जा रहा है (वार्षिक, छमाही, या तिमाही)।

खंड 2: अनिवार्य सूत्र (Essential Formulas)

1. मिश्रधन (Amount) निकालने का सूत्र:

A = P [1 + (R/100)]n

2. चक्रवृद्धि ब्याज (C.I.) निकालना:

C.I. = A – P

या C.I. = P [(1 + R/100)n – 1]

3. विशेष स्थितियाँ (संयोजन):

  • यदि ब्याज छमाही (Half-yearly) देय हो: दर को आधा (R/2) करें और समय को दुगुना (2n) करें।
  • यदि ब्याज तिमाही (Quarterly) देय हो: दर को चौथाई (R/4) करें और समय को चार गुना (4n) करें।

खंड 3: प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्वपूर्ण प्रश्न और समाधान

प्रश्न 1: 10,000 रुपये पर 10% वार्षिक दर से 2 वर्ष का चक्रवृद्धि ब्याज क्या होगा?

समाधान:

P = 10000, R = 10, n = 2.

Step 1: मिश्रधन (A) = 10000 [1 + 10/100]²

= 10000 × (11/10) × (11/10) = 12100 रुपये।

Step 2: C.I. = 12100 – 10000 = 2100 रुपये।

उत्तर: 2100 रुपये

प्रश्न 2: 2 वर्ष के लिए साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज का अंतर 50 रुपये है। यदि दर 5% हो, तो मूलधन क्या होगा?

समाधान (शानदार ट्रिक):

2 वर्ष के लिए अंतर (D) = P (R/100)²

50 = P (5/100)²

50 = P (1/20)² => 50 = P / 400

P = 50 × 400 = 20,000 रुपये।

उत्तर: 20,000 रुपये

प्रश्न 3: कोई राशि चक्रवृद्धि ब्याज से 5 वर्ष में दुगुनी हो जाती है। वह 8 गुनी कितने समय में होगी?

समाधान (ट्रिक):

2 गुना = 5 वर्ष।

8 गुना = 2³ गुना।

समय = (घात) × (पहला समय) = 3 × 5 = 15 वर्ष।

उत्तर: 15 वर्ष


खंड 4: C.I. निकालने की ‘Successive’ और ‘Ratio’ ट्रिक

बड़े फॉर्मूलों से बचने के लिए ‘अनुपात विधि’ (Ratio Method) सबसे तेज है:

  • 2 वर्ष के लिए अनुपात: 2 : 1
  • 3 वर्ष के लिए अनुपात: 3 : 3 : 1

उदाहरण (2 वर्ष): 1000 का 10% = 100. फिर 100 का 10% = 10.

C.I. = (100 × 2) + (10 × 1) = 210.


खंड 5: मोबाइल यूजर्स के लिए “स्मार्ट रिवीज़न” नोट्स

  • पहले वर्ष का राज: पहले वर्ष के लिए साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज हमेशा बराबर होते हैं।
  • जनसंख्या वृद्धि: शहर की जनसंख्या बढ़ने वाले सवाल भी इसी चक्रवृद्धि ब्याज के सूत्र से हल होते हैं।
  • किस्त (Installment): C.I. की किस्त निकालते समय [1 / (1 + R/100)] का प्रयोग किया जाता है।
  • ब्याज दर तुलना: यदि ब्याज वार्षिक की जगह छमाही संयोजित हो, तो आपको हमेशा अधिक ब्याज मिलेगा।

स्वयं अभ्यास हेतु प्रश्न (Practice Set)

  1. 5000 रुपये पर 20% की दर से 1.5 वर्ष का चक्रवृद्धि ब्याज क्या होगा यदि ब्याज छमाही देय हो?
  2. किस दर पर 2 वर्ष में 1000 रुपये की राशि 1210 रुपये हो जाएगी?
  3. 3 वर्ष के लिए C.I. और S.I. के अंतर का सूत्र क्या है? (संकेत: D = P(R/100)² × (300+R)/100)
  4. एक टीवी 21,000 में खरीदा गया। 10% वार्षिक अवमूल्यन (Depreciation) के बाद 2 वर्ष बाद इसका मूल्य क्या होगा?

— चक्रवृद्धि ब्याज का अध्याय यहाँ समाप्त होता है। अगला लक्ष्य: समय और कार्य (Time and Work) का अभ्यास करें। —

अध्याय 8: साधारण ब्याज (Simple Interest)

अध्याय 8: साधारण ब्याज (Simple Interest) – विस्तृत मार्गदर्शिका

“पैसे के समय मूल्य और निवेश की गणना का आधार”

जब हम किसी बैंक या व्यक्ति से पैसा उधार लेते हैं या किसी को उधार देते हैं, तो उस पैसे के उपयोग के बदले जो अतिरिक्त राशि चुकाई या प्राप्त की जाती है, उसे ब्याज (Interest) कहते हैं। साधारण ब्याज वह ब्याज है जो केवल मूलधन (Principal) पर ही हर साल समान रूप से लगता है। यह चक्रवृद्धि ब्याज की तुलना में सरल और गणना में आसान होता है।


खंड 1: महत्वपूर्ण शब्दावली (Key Terms)

साधारण ब्याज के सवालों को हल करने के लिए इन पांच शब्दों को समझना अनिवार्य है:

  • मूलधन (Principal – P): वह राशि जो उधार ली या दी गई है।
  • दर (Rate – R): ब्याज की वह प्रतिशत दर जिस पर पैसा दिया गया है (यह अक्सर वार्षिक होती है)।
  • समय (Time – T): वह अवधि जिसके लिए पैसा उधार लिया गया है।
  • साधारण ब्याज (Simple Interest – S.I.): वह अतिरिक्त राशि जो मूलधन पर मिलती है।
  • मिश्रधन (Amount – A): मूलधन और ब्याज का कुल योग। (A = P + S.I.)

खंड 2: अनिवार्य सूत्र (Essential Formulas)

साधारण ब्याज का सबसे प्रसिद्ध सूत्र:

S.I. = (P × R × T) / 100

अन्य सहायक सूत्र:

1. मूलधन (P) = (S.I. × 100) / (R × T)

2. दर (R) = (S.I. × 100) / (P × T)

3. समय (T) = (S.I. × 100) / (P × R)

4. मिश्रधन (A) = P + S.I.


खंड 3: प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्वपूर्ण प्रश्न और विस्तृत समाधान

प्रश्न 1: 5000 रुपये पर 10% वार्षिक दर से 3 वर्ष का साधारण ब्याज क्या होगा?

समाधान:

P = 5000, R = 10, T = 3.

S.I. = (5000 × 10 × 3) / 100

= 50 × 10 × 3 = 1500 रुपये।

मिश्रधन (A) = 5000 + 1500 = 6500 रुपये।

उत्तर: 1500 रुपये

प्रश्न 2: कितने समय में 2000 रुपये की राशि 5% वार्षिक दर से 2500 रुपये हो जाएगी?

समाधान:

P = 2000, A = 2500.

सबसे पहले ब्याज (S.I.) निकालें: 2500 – 2000 = 500 रुपये।

अब समय (T) का सूत्र लगाएं:

T = (500 × 100) / (2000 × 5)

= 50000 / 10000 = 5 वर्ष।

उत्तर: 5 वर्ष

प्रश्न 3: कोई राशि साधारण ब्याज की दर से 10 वर्ष में दुगुनी हो जाती है। ब्याज की दर क्या है?

समाधान (ट्रिक):

जब राशि ‘n’ गुना हो जाए: R = [(n – 1) × 100] / T

यहाँ n = 2, T = 10.

R = [(2 – 1) × 100] / 10 = 100 / 10 = 10%.

उत्तर: 10%


खंड 4: विशेष प्रकार के प्रश्न और शॉर्टकट ट्रिक्स

1. जब समय महीनों या दिनों में दिया हो:

ब्याज हमेशा वार्षिक दर पर निकलता है।

यदि समय 6 महीने है, तो T = 6/12 = 1/2 वर्ष।

यदि समय 73 दिन है, तो T = 73/365 = 1/5 वर्ष।

2. किस्तों (Installments) वाले सवाल:

जब कोई ऋण किस्तों में चुकाया जाता है, तो प्रत्येक किस्त पर बचा हुआ समय ब्याज के रूप में जोड़ा जाता है। इसका सूत्र जटिल हो सकता है, लेकिन “औसत समय” की ट्रिक से इसे आसानी से हल किया जा सकता है।

3. राशि का बंटवारा (Partial Investment):

यदि एक ही राशि को दो अलग-अलग दरों पर निवेश किया जाए और कुल ब्याज दिया हो, तो ‘मिश्रण’ (Alligation) विधि का प्रयोग करें।


खंड 5: मोबाइल यूजर्स के लिए “स्मार्ट रिवीज़न” नोट्स

  • समान ब्याज: साधारण ब्याज हर साल बराबर रहता है। यदि पहले साल 100 रुपये ब्याज मिला, तो दूसरे साल भी 100 ही मिलेगा।
  • R और T का सीधा संबंध: यदि दर और समय का गुणा किया जाए, तो वह सीधे मूलधन का उतना ही प्रतिशत ब्याज देता है। (जैसे 5% दर और 4 वर्ष = 20% ब्याज)।
  • सावधानी: हमेशा सुनिश्चित करें कि दर (Rate) और समय (Time) की इकाई एक ही हो (दोनों वार्षिक हों)।

स्वयं अभ्यास हेतु प्रश्न (Practice Set)

  1. किस दर पर 8000 रुपये की राशि 2 वर्ष में 8800 रुपये हो जाएगी?
  2. एक राशि 5 वर्ष में 3 गुनी हो जाती है, तो उसे 9 गुनी होने में कितना समय लगेगा?
  3. 12000 रुपये का 12% वार्षिक दर से 9 महीने का साधारण ब्याज ज्ञात करें।
  4. यदि ब्याज की दर 2% बढ़ा दी जाए, तो 5000 रुपये पर 3 वर्ष में कितना अतिरिक्त ब्याज मिलेगा?

— साधारण ब्याज का अध्याय यहाँ समाप्त होता है। अगला लक्ष्य: चक्रवृद्धि ब्याज (Compound Interest) का अभ्यास करें। —

अध्याय 7: लाभ और हानि (Profit and Loss)

अध्याय 7: लाभ और हानि (Profit and Loss) – पूर्ण मार्गदर्शिका

“व्यापारिक गणनाओं और बुद्धिमत्ता का गणितीय विश्लेषण”

दैनिक जीवन में हम जब भी कोई वस्तु खरीदते या बेचते हैं, तो वहाँ लाभ और हानि का सिद्धांत लागू होता है। गणित का यह अध्याय न केवल परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमें व्यावहारिक जीवन में सही निर्णय लेने में भी मदद करता है। प्रतियोगी परीक्षाओं (SSC, Railway, Bank) में इस अध्याय से 2-3 प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।


खंड 1: महत्वपूर्ण पारिभाषिक शब्दावली (Basic Terms)

सवालों को हल करने से पहले इन शब्दों का अर्थ समझना बहुत जरूरी है:

  • क्रय मूल्य (Cost Price – CP): वह मूल्य जिस पर कोई वस्तु खरीदी जाती है।
  • विक्रय मूल्य (Selling Price – SP): वह मूल्य जिस पर कोई वस्तु बेची जाती है।
  • अंकित मूल्य (Marked Price – MP): वह मूल्य जो वस्तु पर छपा होता है (इसे सूची मूल्य भी कहते हैं)।
  • लाभ (Profit): जब विक्रय मूल्य, क्रय मूल्य से अधिक हो (SP > CP)।
  • हानि (Loss): जब क्रय मूल्य, विक्रय मूल्य से अधिक हो (CP > SP)।
  • छूट (Discount): अंकित मूल्य पर दी जाने वाली कटौती।

खंड 2: अनिवार्य सूत्र (Essential Formulas)

1. लाभ और हानि की गणना:

लाभ = विक्रय मूल्य – क्रय मूल्य

हानि = क्रय मूल्य – विक्रय मूल्य

2. प्रतिशत लाभ और हानि (हमेशा क्रय मूल्य पर गिने जाते हैं):

लाभ % = (लाभ / क्रय मूल्य) × 100

हानि % = (हानि / क्रय मूल्य) × 100

3. विक्रय मूल्य निकालना:

SP = CP × [(100 + लाभ%) / 100]

SP = CP × [(100 – हानि%) / 100]

4. क्रय मूल्य निकालना:

CP = (SP × 100) / (100 + लाभ%)

CP = (SP × 100) / (100 – हानि%)


खंड 3: प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्वपूर्ण प्रश्न और समाधान

प्रश्न 1: एक वस्तु 500 रुपये में खरीदी गई और 600 रुपये में बेच दी गई। लाभ प्रतिशत ज्ञात करें।

समाधान:

CP = 500, SP = 600.

लाभ = 600 – 500 = 100 रुपये।

लाभ% = (100 / 500) × 100 = 20%.

उत्तर: 20%

प्रश्न 2: किसी वस्तु को 720 रुपये में बेचने पर 20% की हानि होती है। 20% लाभ कमाने के लिए उसे कितने में बेचना चाहिए?

समाधान:

Step 1: पहले क्रय मूल्य (CP) निकालें।

CP = (720 × 100) / (100 – 20) = (720 × 100) / 80 = 900 रुपये।

Step 2: 20% लाभ के लिए नया SP निकालें।

नया SP = 900 का 120% = 1080 रुपये।

शॉर्टकट: (720 / 80) × 120 = 9 × 120 = 1080 रुपये।

उत्तर: 1080 रुपये

प्रश्न 3: 15 वस्तुओं का क्रय मूल्य 12 वस्तुओं के विक्रय मूल्य के बराबर है। लाभ प्रतिशत क्या है?

समाधान (ट्रिक):

जब CP और SP संख्या में दिए हों: लाभ% = [(अंतर) / विक्रय वस्तुओं की संख्या] × 100

= [(15 – 12) / 12] × 100 = (3 / 12) × 100 = 25%.

उत्तर: 25%


खंड 4: बट्टा या छूट (Discount) वाले सवाल

छूट हमेशा अंकित मूल्य (Marked Price) पर दी जाती है। छूट देने के बाद जो मूल्य बचता है, वही दुकानदार का विक्रय मूल्य होता है।

नियम: विक्रय मूल्य = अंकित मूल्य × (100 – छूट%) / 100

प्रश्न 4: एक वस्तु का अंकित मूल्य 1000 रुपये है। उस पर 10% और 20% की दो क्रमिक छूट (Successive Discounts) दी जाती हैं। विक्रय मूल्य क्या होगा?

समाधान:

Step 1: 1000 का 90% = 900.

Step 2: 900 का 80% = 720.

उत्तर: 720 रुपये


खंड 5: बेईमान दुकानदार (Dishonest Dealer) वाले सवाल

ये प्रश्न अक्सर परीक्षाओं में उलझाते हैं। इसका सीधा सूत्र याद रखें:

लाभ% = [ त्रुटि / (सही मान – त्रुटि) ] × 100

उदाहरण: एक दुकानदार 1 किलो के स्थान पर 900 ग्राम वाट का प्रयोग करता है।

त्रुटि = 100 ग्राम।

लाभ% = [ 100 / (1000 – 100) ] × 100 = 100/900 × 100 = 11.11%.


मोबाइल यूजर्स के लिए “स्मार्ट रिवीज़न” नोट्स

  • No CP, No Profit: जब तक क्रय मूल्य पता न हो, लाभ या हानि प्रतिशत नहीं निकाला जा सकता।
  • शून्य लाभ-हानि: यदि दो वस्तुओं को समान मूल्य पर बेचा जाए, एक पर x% लाभ और दूसरी पर x% हानि हो, तो हमेशा हानि ही होगी। हानि% = (x/10)².
  • अंकित मूल्य ट्रिक: यदि दुकानदार छूट देने के बाद भी लाभ कमाना चाहता है, तो अंकित मूल्य = क्रय मूल्य × [(100 + लाभ%) / (100 – छूट%)].

स्वयं अभ्यास हेतु प्रश्न (Practice Set)

  1. एक कुर्सी 800 रुपये में खरीदकर 20% लाभ पर बेची गई। विक्रय मूल्य ज्ञात करें।
  2. 20 वस्तुओं का विक्रय मूल्य 25 वस्तुओं के क्रय मूल्य के बराबर है। लाभ या हानि प्रतिशत क्या होगा?
  3. 10%, 20% और 30% का एकल समतुल्य बट्टा (Equivalent Discount) क्या है?
  4. एक मोबाइल को 4500 में बेचने पर 10% हानि होती है। 10% लाभ के लिए उसे कितने में बेचें?

— लाभ और हानि का अध्याय यहाँ समाप्त होता है। अगला लक्ष्य: साधारण ब्याज (Simple Interest) का अभ्यास करें। —

अध्याय 6: प्रतिशत (Percentage)

अध्याय 6: प्रतिशत (Percentage) – शून्य से शिखर तक

“हर गणना का आधार – सौ (100) पर आधारित तुलना”

प्रतिशत का शाब्दिक अर्थ है ‘प्रति सैकड़ा’ या ‘सौ में से’। गणित में प्रतिशत वह भिन्न है जिसका हर (Denominator) हमेशा 100 होता है। इसे ‘%’ चिह्न से दर्शाया जाता है। यदि हम कहते हैं कि किसी छात्र ने 80% अंक प्राप्त किए, तो इसका मतलब है कि उसने प्रत्येक 100 अंकों में से 80 अंक प्राप्त किए हैं।


खंड 1: बुनियादी नियम और रूपांतरण (Conversion)

प्रतिशत के सवालों को तेज़ी से हल करने के लिए आपको भिन्नों और प्रतिशत के बीच का संबंध पता होना चाहिए।

1. प्रतिशत को भिन्न में बदलना:

प्रतिशत का चिह्न हटाएं और संख्या को 100 से भाग दें।

उदाहरण: 20% = 20/100 = 1/5.

2. भिन्न को प्रतिशत में बदलना:

भिन्न को 100 से गुणा करें और ‘%’ का चिह्न लगाएं।

उदाहरण: 1/4 = (1/4 × 100)% = 25%.

महत्वपूर्ण मान (याद रखें):

  • 1/2 = 50%
  • 1/3 = 33.33%
  • 1/4 = 25%
  • 1/5 = 20%
  • 1/8 = 12.5%
  • 1/10 = 10%

खंड 2: प्रतिशत के प्रमुख प्रकार और सूत्र

नियम 1: प्रतिशत वृद्धि और कमी

यदि किसी संख्या में x% की वृद्धि की जाती है, तो नई संख्या = मूल संख्या × (100 + x) / 100.

यदि कमी की जाती है, तो नई संख्या = मूल संख्या × (100 – x) / 100.

नियम 2: प्रतिशत तुलना (Comparison)

यदि A की आय B से 25% अधिक है, तो B की आय A से कितने प्रतिशत कम है?

सूत्र: [r / (100 + r)] × 100

हल: [25 / (100 + 25)] × 100 = 25/125 × 100 = 20%.

नियम 3: लगातार परिवर्तन (Successive Change)

यदि किसी वस्तु की कीमत पहले x% बढ़ाई जाए और फिर y% बढ़ाई जाए।

कुल परिवर्तन सूत्र: x + y + (xy / 100)


खंड 3: प्रतियोगी परीक्षाओं के हल प्रश्न (Detailed Solutions)

प्रश्न 1: एक चुनाव में दो उम्मीदवार थे। जीतने वाले को 60% वोट मिले और वह 4000 वोटों से जीत गया। कुल कितने वोट पड़े?

समाधान:

जीतने वाले को मिले = 60%.

हारने वाले को मिले = 100% – 60% = 40%.

जीत का अंतर प्रतिशत में = 60% – 40% = 20%.

प्रश्न के अनुसार, 20% = 4000.

1% = 4000 / 20 = 200.

कुल वोट (100%) = 200 × 100 = 20,000.

उत्तर: 20,000

प्रश्न 2: चीनी के मूल्य में 20% की वृद्धि होने पर एक गृहिणी को अपनी खपत कितने प्रतिशत कम करनी चाहिए ताकि खर्च न बढ़े?

समाधान:

वृद्धि (r) = 20%.

कमी प्रतिशत = [r / (100 + r)] × 100

= [20 / (100 + 20)] × 100 = 20/120 × 100 = 16.66%.

उत्तर: 16.66%

प्रश्न 3: एक शहर की जनसंख्या 10,000 है। यह प्रतिवर्ष 10% की दर से बढ़ती है। 2 वर्ष बाद जनसंख्या क्या होगी?

समाधान:

प्रथम वर्ष बाद = 10,000 का 110% = 11,000.

द्वितीय वर्ष बाद = 11,000 का 110% = 12,100.

शॉर्टकट: 10,000 × (110/100) × (110/100) = 12,100.

उत्तर: 12,100


खंड 4: परीक्षाओं के लिए विशेष “टाइप्स”

1. परीक्षा में फेल-पास वाले सवाल:

अक्सर पूछा जाता है कि एक छात्र को पास होने के लिए 33% चाहिए थे, उसने 25% लिए और 40 अंकों से फेल हो गया। ऐसे सवालों में प्रतिशत के अंतर को अंकों के अंतर के बराबर रखें।

2. मिश्रण (Mixture) वाले सवाल:

जैसे—दूध और पानी के 40 लीटर मिश्रण में 10% पानी है। कितना पानी और मिलाएं कि पानी 20% हो जाए? यहाँ ‘दूध’ की मात्रा को स्थिर (Constant) रखकर हल करें।


खंड 5: मोबाइल टिप्स और ट्रिक्स (Quick Revision)

  • 10% निकालना: किसी भी संख्या का 10% निकालने के लिए पीछे से एक अंक छोड़कर बिंदु लगा दें। (जैसे 500 का 10% = 50.0)।
  • 1% निकालना: दो अंक छोड़कर बिंदु लगाएं। (500 का 1% = 5.00)।
  • AB नियम: यदि A, B से बढ़ता है और B, C से, तो हमेशा 100 मानकर शुरू करना आसान होता है।
  • आय और व्यय: आय = खर्च + बचत। बचत हमेशा आय का वह हिस्सा है जो खर्च के बाद बचता है।

अभ्यास प्रश्नावली (Practice Questions)

  1. 0.05 को प्रतिशत में बदलें।
  2. यदि किसी संख्या का 40%, 120 है, तो वह संख्या क्या है?
  3. एक आयत की लंबाई 20% बढ़ाई गई और चौड़ाई 10% कम की गई। क्षेत्रफल पर क्या प्रभाव पड़ा?
  4. एक टोकरी में 20% सेब खराब हैं। यदि अच्छे सेबों की संख्या 80 है, तो कुल सेब कितने थे?

— प्रतिशत का अध्याय यहाँ समाप्त होता है। इसे अच्छे से समझें क्योंकि अगला अध्याय ‘लाभ और हानि’ इसी पर टिका है। —

अध्याय 5: औसत (Average)

अध्याय 5: औसत (Average) – संपूर्ण मार्गदर्शिका

“संख्याओं के बीच का संतुलन और माध्य निकालने की सरल विधि”

गणित में औसत (Average) वह मान है जो दी गई संख्याओं के पूरे समूह का प्रतिनिधित्व करता है। इसे ‘मध्यमान’ या ‘माध्य’ (Mean) भी कहा जाता है। दैनिक जीवन में हम अक्सर “औसत माइलेज”, “औसत अंक” या “औसत आय” जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में औसत से संबंधित प्रश्न लगभग हर साल पूछे जाते हैं क्योंकि यह तार्किक क्षमता की जाँच करता है।


भाग 1: औसत की परिभाषा और मूल सूत्र

औसत का सीधा सा अर्थ है—सभी दी गई राशियों को जोड़कर उनकी कुल संख्या से भाग देना।

औसत = (राशियों का कुल योग) / (राशियों की कुल संख्या)

इसी सूत्र से हम ‘योग’ भी निकाल सकते हैं:

कुल योग = औसत × कुल संख्या

औसत की मुख्य विशेषताएँ:

  • औसत हमेशा समूह की सबसे छोटी संख्या से बड़ा और सबसे बड़ी संख्या से छोटा होता है।
  • यदि समूह की प्रत्येक संख्या में ‘x’ जोड़ दिया जाए, तो नया औसत भी ‘x’ बढ़ जाएगा।
  • यदि प्रत्येक संख्या को ‘x’ से गुणा कर दिया जाए, तो नया औसत भी ‘x’ गुना हो जाएगा।

भाग 2: महत्वपूर्ण शॉर्टकट सूत्र (Smart Formulas)

परीक्षा में समय बचाने के लिए निम्नलिखित नियमों को याद रखना बहुत जरूरी है:

1. प्रथम ‘n’ प्राकृतिक संख्याओं का औसत:

सूत्र: (n + 1) / 2

उदाहरण: 1 से 50 तक की संख्याओं का औसत = (50+1)/2 = 25.5.

2. प्रथम ‘n’ पूर्ण संख्याओं का औसत:

सूत्र: n / 2

उदाहरण: प्रथम 10 पूर्ण संख्याओं (0 से 9) का औसत = 10/2 = 5.

3. प्रथम ‘n’ सम संख्याओं का औसत:

सूत्र: (n + 1)

उदाहरण: प्रथम 20 सम संख्याओं का औसत = 20 + 1 = 21.

4. प्रथम ‘n’ विषम संख्याओं का औसत:

सूत्र: n

उदाहरण: प्रथम 15 विषम संख्याओं का औसत = 15 ही होगा।

5. लगातार संख्याओं या समान अंतर वाली श्रेणियों का औसत:

सूत्र: (प्रथम पद + अंतिम पद) / 2

उदाहरण: 5, 10, 15, 20, 25 का औसत = (5 + 25) / 2 = 15.


भाग 3: औसत चाल (Average Speed)

जब कोई व्यक्ति दो समान दूरियाँ अलग-अलग चाल (x और y) से तय करता है, तो पूरी यात्रा की औसत चाल के लिए विशेष सूत्र का उपयोग किया जाता है:

औसत चाल = (2xy) / (x + y)

सावधानी: औसत चाल निकालने के लिए कभी भी चालों को जोड़कर 2 से भाग न दें, वह गलत उत्तर होगा।


भाग 4: प्रतियोगी परीक्षाओं के हल प्रश्न (Solved Examples)

प्रश्न 1: 5 संख्याओं का औसत 20 है। यदि एक नई संख्या जोड़ दी जाए, तो औसत 22 हो जाता है। जोड़ी गई संख्या क्या है?

समाधान:

5 संख्याओं का योग = 5 × 20 = 100.

6 संख्याओं का योग = 6 × 22 = 132.

नई संख्या = 132 – 100 = 32.

उत्तर: 32

प्रश्न 2: एक बल्लेबाज ने 11वीं पारी में 100 रन बनाए, जिससे उसका औसत 5 रन बढ़ गया। 11वीं पारी के बाद उसका नया औसत क्या है?

समाधान:

नया औसत = बनाए गए रन – (कुल पारी × औसत वृद्धि) + औसत वृद्धि

शॉर्टकट: 100 – (11 × 5) + 5 = 100 – 55 + 5 = 50.

उत्तर: 50

प्रश्न 3: 7 लगातार विषम संख्याओं का औसत 25 है। सबसे बड़ी संख्या ज्ञात करें।

समाधान: लगातार संख्याओं में औसत हमेशा ‘बीच की संख्या’ होती है।

संख्याएं: 19, 21, 23, (25), 27, 29, 31.

उत्तर: 31

प्रश्न 4: एक कक्षा के 20 छात्रों की औसत आयु 15 वर्ष है। यदि शिक्षक की आयु भी शामिल कर ली जाए, तो औसत 1 वर्ष बढ़ जाता है। शिक्षक की आयु क्या है?

समाधान: शिक्षक की आयु = पुराना औसत + (नयी कुल संख्या × औसत वृद्धि)

= 15 + (21 × 1) = 15 + 21 = 36 वर्ष।

उत्तर: 36 वर्ष


भाग 5: मोबाइल यूजर्स के लिए “स्मार्ट टिप्स”

  • समूह छोड़ने या शामिल होने पर: यदि औसत बढ़ता है, तो आने वाला व्यक्ति औसत से ज्यादा वजन/आयु का है।
  • गलती सुधारने वाले सवाल: यदि 50 की जगह गलती से 40 पढ़ लिया गया, तो सही औसत निकालने के लिए (सही – गलत) / कुल संख्या को पुराने औसत में जोड़ दें।
  • बाएँ से दाएँ नियम: औसत हमेशा बीच का रास्ता दिखाता है, इसलिए गणना करते समय बड़ी संख्याओं को छोटे टुकड़ों में तोड़कर देखें।

स्वयं अभ्यास हेतु प्रश्न

  1. प्रथम 100 प्राकृतिक संख्याओं का औसत क्या होगा?
  2. एक कार 60 किमी/घंटा की चाल से जाती है और 40 किमी/घंटा की चाल से वापस आती है। पूरी यात्रा की औसत चाल ज्ञात करें।
  3. 5 क्रमागत सम संख्याओं का औसत 42 है। सबसे छोटी संख्या क्या है?
  4. एक परिवार के 4 सदस्यों की औसत आयु 25 वर्ष है। यदि एक बच्चा पैदा होता है, तो 2 वर्ष बाद परिवार की औसत आयु क्या होगी?

— औसत का अध्याय यहाँ समाप्त होता है। अगला लक्ष्य: प्रतिशत (Percentage) का अभ्यास करें। —

अध्याय 4: लसवि और मसवि (L.C.M. & H.C.F.)

अध्याय 4: लसवि और मसवि (L.C.M. & H.C.F.) – विस्तृत मार्गदर्शिका

“संख्याओं के विभाजन और मिलन के आधारभूत नियमों का संपूर्ण ज्ञान”

गणित की गणनाओं को सटीक और सरल बनाने के लिए लसवि (L.C.M.) और मसवि (H.C.F.) का ज्ञान होना नींव की ईंट की तरह है। प्रतियोगी परीक्षाओं में चाहे वह सरलीकरण (Simplification) हो, समय और कार्य (Time & Work) हो, या भिन्नों का जोड़-घटाव, इन दोनों के बिना आगे बढ़ना लगभग असंभव है। इस लेख में हम लसवि और मसवि को शून्य से शिखर तक (Basic to Advance) विस्तार से समझेंगे।


भाग 1: मसवि (म.स.प.) – महत्तम समापवर्तक

मसवि (Highest Common Factor – H.C.F.): वह बड़ी से बड़ी संख्या जो दी गई दो या दो से अधिक संख्याओं को बिना किसी शेषफल के पूरा-पूरा विभाजित कर दे, उसे उन संख्याओं का ‘महत्तम समापवर्तक’ कहते हैं।

मसवि निकालने की प्रमुख विधियाँ:

1. गुणनखंड विधि (Factor Method): इसमें हम दी गई संख्याओं के सभी विभाजक लिखते हैं और उनमें से सबसे बड़े सामान्य अंक को चुनते हैं।

उदाहरण: 18 और 24 का मसवि निकालें।

18 के विभाजक: 1, 2, 3, 6, 9, 18

24 के विभाजक: 1, 2, 3, 4, 6, 8, 12, 24

दोनों सूचियों में ‘6’ वह सबसे बड़ा अंक है जो दोनों को काट रहा है। अतः मसवि = 6.

2. अभाज्य गुणनखंड विधि (Prime Factorization): संख्याओं को अभाज्य अंकों (2, 3, 5, 7…) के गुणा के रूप में लिखें और केवल सामान्य (Common) अंकों की सबसे छोटी घात को चुनें।

उदाहरण: 36 और 48 का मसवि।

36 = 2² × 3²

48 = 2⁴ × 3¹

न्यूनतम घात: 2² × 3¹ = 4 × 3 = 12. अतः मसवि = 12.

3. भाग विधि (Division Method): यह विधि बड़ी संख्याओं के लिए सबसे तेज काम करती है। छोटी संख्या से बड़ी को भाग दें, फिर जो शेषफल आए उससे पुराने भाजक को भाग दें। यह प्रक्रिया तब तक करें जब तक शेषफल 0 न आ जाए। अंतिम भाजक ही मसवि होगा।


भाग 2: लसवि (ल.स.प.) – लघुत्तम समापवर्त्य

लसवि (Least Common Multiple – L.C.M.): वह छोटी से छोटी संख्या जो दी गई सभी संख्याओं से पूरी तरह विभाजित (कटी) हो जाए, उसे ‘लघुत्तम समापवर्त्य’ कहते हैं। मसवि संख्या को काटता है, जबकि लसवि संख्याओं से खुद कटता है।

लसवि निकालने की विधियाँ:

1. साझा भाग विधि (Common Division Method): सभी संख्याओं को एक कतार में लिखकर अभाज्य संख्याओं से भाग देना शुरू करें जब तक कि अंत में सभी के नीचे ‘1’ न बच जाए।

उदाहरण: 10, 15, 20 का लसवि।

10, 15, 20 को 2 से भाग दें -> 5, 15, 10

फिर 2 से भाग दें -> 5, 15, 5

फिर 3 से भाग दें -> 5, 5, 5

फिर 5 से भाग दें -> 1, 1, 1

लसवि = 2 × 2 × 3 × 5 = 60.

2. अभाज्य गुणनखंड विधि: सभी संख्याओं को अभाज्य टुकड़ों में तोड़ें और प्रत्येक अभाज्य अंक की ‘अधिकतम’ घात का गुणा करें।

उदाहरण: 12, 16 का लसवि।

12 = 2² × 3¹

16 = 2⁴

अधिकतम घातें: 2⁴ × 3¹ = 16 × 3 = 48.


भाग 3: लसवि और मसवि के जादुई सूत्र

परीक्षा में समय बचाने के लिए ये सूत्र रामबाण हैं:

पहली संख्या × दूसरी संख्या = लसवि × मसवि

विशेष स्थितियों के लिए सूत्र:

  • भिन्नों (Fractions) का लसवि: (अंशों का लसवि) / (हरों का मसवि)
  • भिन्नों (Fractions) का मसवि: (अंशों का मसवि) / (हरों का लसवि)
  • दशमलव का लसवि/मसवि: पहले दशमलव हटाकर उन्हें पूर्ण संख्या बनाएं (जैसे 1.2 को 12), फिर उत्तर आने पर वापस उतने ही स्थान पर दशमलव लगा दें।

भाग 4: प्रतियोगी परीक्षाओं के चुनिंदा हल प्रश्न

प्रश्न 1: दो संख्याओं का मसवि 11 है और उनका लसवि 693 है। यदि पहली संख्या 77 है, तो दूसरी क्या होगी?

समाधान: दूसरी संख्या = (लसवि × मसवि) / पहली संख्या

= (693 × 11) / 77

= 693 / 7 = 99.

उत्तर: 99

प्रश्न 2: वह छोटी से छोटी संख्या ज्ञात करें जिसे 12, 15, 20 और 54 से भाग देने पर प्रत्येक दशा में 4 शेष बचे?

समाधान:

Step 1: 12, 15, 20 और 54 का लसवि निकालें। लसवि = 540.

Step 2: चूंकि 4 शेष बचाना है, तो संख्या = 540 + 4 = 544.

उत्तर: 544

प्रश्न 3: चार घंटियाँ क्रमशः 6, 8, 12 और 18 सेकंड के अंतराल पर बजती हैं। यदि वे एक साथ बजना शुरू करें, तो 1 घंटे में वे कितनी बार एक साथ बजेंगी?

समाधान:

Step 1: 6, 8, 12 और 18 का लसवि = 72 सेकंड। (वे हर 72 सेकंड में साथ बजती हैं)

Step 2: 1 घंटा = 3600 सेकंड।

Step 3: साथ बजने की संख्या = (3600 / 72) + 1 (शुरुआती समय के लिए)

= 50 + 1 = 51 बार।

उत्तर: 51


भाग 5: महत्वपूर्ण टिप्स और ट्रिक्स (Quick Notes)

  • पहचान की ट्रिक: यदि प्रश्न में “बड़ी से बड़ी” या “अधिकतम लंबाई” पूछा जाए, तो 99% मामलों में मसवि निकालना होता है।
  • न्यूनतम समय की ट्रिक: यदि “छोटी से छोटी” या “न्यूनतम समय/दूरी” या “पुनः एक साथ मिलना” पूछा जाए, तो लसवि निकालें।
  • सह-अभाज्य (Co-prime): ऐसी संख्याएँ जिनमें कुछ भी कॉमन न हो (जैसे 5 और 7), उनका मसवि हमेशा 1 होता है।
  • लसवि की जांच: लसवि हमेशा दी गई संख्याओं में सबसे बड़ी संख्या के बराबर या उससे बड़ा ही होगा।
  • मसवि की जांच: मसवि हमेशा दी गई संख्याओं में सबसे छोटी संख्या के बराबर या उससे छोटा ही होगा।

स्वयं अभ्यास हेतु प्रश्न (Practice Set)

  1. दो संख्याओं का अनुपात 3:4 है और उनका मसवि 4 है। उनका लसवि क्या होगा? (संकेत: संख्याएं 12 और 16 होंगी)।
  2. वह बड़ी से बड़ी संख्या क्या है जिससे 1657 और 2037 को भाग देने पर क्रमशः 6 और 5 शेष बचे?
  3. 0.6, 1.8 और 0.36 का लसवि ज्ञात करें।
  4. दो संख्याओं का योग 216 है और उनका मसवि 27 है। ऐसी संख्याओं के कितने जोड़े (Pairs) संभव हैं?

— यहाँ लसवि और मसवि का संपूर्ण अध्याय समाप्त होता है। निरंतर अभ्यास ही गणित पर विजय प्राप्त करने की कुंजी है! —

अध्याय 3: दशमलव और भिन्न (Decimal and Fraction)

भिन्न और दशमलव (Fraction & Decimal) का महा-ज्ञान

“अंकों के अंशों को समझने की संपूर्ण और सरल मार्गदर्शिका”

गणित की आधारशिला केवल पूर्ण संख्याओं पर नहीं टिकी है। जब हम किसी एक वस्तु को कई हिस्सों में बांटते हैं, तो वहाँ से जन्म होता है भिन्न (Fraction) और दशमलव (Decimal) का। एक छात्र के लिए इन दोनों के बीच का संबंध समझना उतना ही जरूरी है जितना कि सांस लेना। चाहे वह बैंक का ब्याज निकालना हो या किसी खेत का बंटवारा करना, इन दोनों का ज्ञान अनिवार्य है।


खंड 1: भिन्न (Fraction) – गहराई से समझें

भिन्न का अर्थ है ‘टूटा हुआ हिस्सा’। यदि हम एक रोटी के चार बराबर टुकड़े करें और उसमें से एक टुकड़ा उठा लें, तो वह गणितीय रूप में 1/4 कहलाएगा। यहाँ 1 ‘अंश’ (Numerator) है और 4 ‘हर’ (Denominator) है।

1. भिन्नों का विस्तृत वर्गीकरण

भिन्नों को उनकी प्रकृति के आधार पर सात मुख्य श्रेणियों में बांटा जा सकता है:

  • उचित भिन्न (Proper Fraction): इसमें अंश हमेशा हर से छोटा होता है। इनका मान हमेशा 1 से कम होता है। जैसे: 2/5, 7/9, 11/13.
  • अनुचित भिन्न (Improper Fraction): इसमें अंश, हर से बड़ा या उसके बराबर होता है। इनका मान 1 या 1 से अधिक होता है। जैसे: 5/2, 8/3, 10/7.
  • मिश्रित भिन्न (Mixed Fraction): यह एक पूर्ण संख्या और एक उचित भिन्न का मिश्रण है। जैसे: 3½ (साढ़े तीन), 5¾.
  • इकाई भिन्न (Unit Fraction): जिसका अंश हमेशा 1 होता है। जैसे: 1/2, 1/5, 1/100.
  • तुल्य भिन्न (Equivalent Fraction): वे भिन्न जो दिखने में अलग हों लेकिन मान में समान हों। जैसे: 1/2, 2/4, 5/10 (सबका मान 0.5 ही है)।
  • सजातीय भिन्न (Like Fractions): जिनके ‘हर’ समान होते हैं। जैसे: 1/7, 3/7, 5/7.
  • विजातीय भिन्न (Unlike Fractions): जिनके ‘हर’ अलग-अलग होते हैं। जैसे: 2/3, 4/5, 1/9.

2. भिन्नों पर गणितीय क्रियाएं (Detailed Operations)

(A) भिन्नों का जोड़ और घटाव:

यदि हर समान हैं, तो अंशों को सीधे जोड़ें। लेकिन यदि हर अलग हैं, तो एल.सी.एम. (LCM) लेना अनिवार्य है।

उदाहरण: 2/3 + 1/4

3 और 4 का LCM = 12.

समीकरण: (2×4 + 1×3) / 12 = (8 + 3) / 12 = 11/12.

(B) भिन्नों का गुणा:

यह सबसे सरल क्रिया है। अंश का गुणा अंश से और हर का गुणा हर से करें।

उदाहरण: 5/7 × 3/2 = (5×3) / (7×2) = 15/14.

(C) भिन्नों का भाग:

भाग के चिह्न को गुणा में बदलें और दूसरी भिन्न को पलट (Reciprocal) दें।

उदाहरण: 3/5 ÷ 2/7 = 3/5 × 7/2 = 21/10.


खंड 2: दशमलव (Decimal) – दशमलव का जादू

दशमलव प्रणाली वह है जहाँ हम 10 के आधार पर संख्याओं को लिखते हैं। दशमलव बिंदु के दाईं ओर का पहला अंक ‘दशांश’ (1/10), दूसरा ‘शतांश’ (1/100) और तीसरा ‘सहस्त्रांश’ (1/1000) कहलाता है।

1. दशमलव के प्रकार और उनकी पहचान

  • शांत दशमलव (Terminating): जो भाग देने पर पूरी तरह खत्म हो जाए। जैसे: 1/4 = 0.25.
  • अशांत आवर्ती (Non-terminating Recurring): जो कभी खत्म न हो लेकिन अंक दोहराए जाएं। जैसे: 1/3 = 0.3333…
  • अशांत अनावर्ती (Non-terminating Non-recurring): जो न खत्म हो और न ही अंक दोहराए। इन्हें ‘अपरिमेय संख्या’ (Irrational) कहते हैं। जैसे: π (3.14159…) या √2.

2. दशमलव की गणना में सावधानियां

जोड़/घटाव: मोबाइल यूजर ध्यान दें, हमेशा दशमलव के नीचे दशमलव रखकर शून्य (0) का प्रयोग कर स्थान भरें।

जैसे: 5.2 + 0.008 = 5.200 + 0.008 = 5.208.

गुणा: दशमलव को भूलकर गुणा करें, फिर अंत में दशमलव के बाद के कुल स्थानों को गिनकर बिंदु लगाएं।

जैसे: 1.2 × 0.12 = 144 (यहाँ कुल 1+2=3 स्थान हैं) = 0.144.


खंड 3: रूपांतरण (Conversion) – एक रूप से दूसरे में

1. भिन्न से दशमलव में बदलना

अंश को हर से भाग देना ही एकमात्र तरीका है। यदि हर में 10, 100 या 1000 है, तो बस उतने स्थान छोड़कर बिंदु लगा दें।

जैसे: 45/100 = 0.45; 7/8 = 0.875.

2. दशमलव से भिन्न में बदलना

दशमलव हटाएं, नीचे 1 लिखें और दशमलव के बाद जितने अंक थे, उतने शून्य बढ़ा दें। फिर उसे सरलतम रूप (काटकर) में लिखें।

जैसे: 0.125 = 125/1000 = 1/8.

3. आवर्ती दशमलव (Bar) को भिन्न में बदलना (Special Trick)

यह परीक्षाओं का सबसे प्रिय हिस्सा है।

नियम: जितने अंकों पर बार (—) है, नीचे उतने 9 लगाएं।

उदाहरण 1: 0.777… = 7/9.

उदाहरण 2: 0.4545… = 45/99 = 5/11.


खंड 4: प्रतियोगी परीक्षाओं के चुनिंदा प्रश्न (Solved)

प्रश्न 1: 3/5, 4/7, 8/9 और 2/3 में सबसे छोटी और सबसे बड़ी भिन्न कौन सी है?

समाधान (भाग विधि):

3/5 = 0.60

4/7 = 0.57 (सबसे छोटी)

8/9 = 0.88 (सबसे बड़ी)

2/3 = 0.66

प्रश्न 2: 1 + 1/(1 + 1/2) का मान क्या होगा? (लंगड़ी भिन्न)

समाधान: नीचे से शुरू करें।

1 + 1/2 = 3/2.

अब: 1 + 1/(3/2) = 1 + 2/3 = 5/3.

उत्तर: 5/3

प्रश्न 3: 0.04 × 0.0162 ÷ 0.02 का मान क्या है?

समाधान: पहले दशमलव संतुलित करें।

(4/100 × 162/10000) ÷ (2/100)

= (4 × 162) / 1000000 × 100/2

= 324 / 10000 = 0.0324.

उत्तर: 0.0324


खंड 5: मोबाइल पर पढ़ने वालों के लिए “Quick Revision Notes”

  • तुलना ट्रिक: दो भिन्नों a/b और c/d में, यदि ad > bc तो a/b बड़ा है।
  • दशमलव भाग ट्रिक: नीचे का दशमलव हटाने के लिए ऊपर उतने शून्य लगाएं। (जैसे 5 ÷ 0.2 = 50 ÷ 2 = 25)।
  • मिश्रित भिन्न सावधानी: गणना से पहले मिश्रित भिन्न (2¾) को अनुचित भिन्न (11/4) में जरूर बदलें।
  • आवर्ती नियम: यदि 0.ab (सिर्फ b पर बार) हो, तो उत्तर (ab – a) / 90 होगा।

निष्कर्ष

भिन्न और दशमलव केवल गणितीय अध्याय नहीं हैं, बल्कि यह आपकी तार्किक शक्ति को बढ़ाने का साधन हैं। इनका निरंतर अभ्यास आपको डेटा इंटरप्रिटेशन (DI) और लाभ-हानि जैसे कठिन अध्यायों में बहुत मदद करेगा। याद रखें, दशमलव की एक छोटी सी गलती रॉकेट को चांद की जगह कहीं और भेज सकती है, इसलिए सटीकता का अभ्यास करें।

— भिन्न और दशमलव का अध्याय यहाँ समाप्त होता है। अगला कदम: प्रतिशत (Percentage) और अनुपात (Ratio) का अभ्यास करें। —

अध्याय 2: संख्या पद्धति (Number System)

संख्या पद्धति (Number System) – पूर्ण मार्गदर्शिका

संख्या पद्धति गणित का वह प्राथमिक अध्याय है जो अंकों के खेल और उनके नियमों को समझाता है। किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र के लिए यह नींव की ईंट की तरह है। जब तक आपको संख्याओं के प्रकार और उनके व्यवहार की समझ नहीं होगी, तब तक आप बीजगणित, अंकगणित या रेखागणित में महारत हासिल नहीं कर सकते। इस लेख में हम संख्या पद्धति के हर उस पहलू को छुएंगे जो परीक्षाओं के लिए अनिवार्य है।

भाग 1: संख्याओं का विस्तृत परिचय (70% सैद्धांतिक भाग)

संख्याओं को उनके गुणों, विभाज्यता और गणितीय व्यवहार के आधार पर अलग-अलग वर्गों में बांटा गया है। नीचे इनका विस्तार से वर्णन है:

1. प्राकृतिक संख्याएँ (Natural Numbers)

प्रकृति में मौजूद वस्तुओं को गिनने के लिए हम जिन अंकों का सहारा लेते हैं, उन्हें प्राकृतिक संख्याएँ कहते हैं। ये हमेशा 1 से शुरू होती हैं।

उदाहरण: 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, … अनंत तक।

ध्यान दें: शून्य (0) प्राकृतिक संख्या नहीं है क्योंकि हम किसी चीज़ की गिनती 0 से शुरू नहीं करते। सबसे छोटी प्राकृतिक संख्या 1 है।

2. पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers)

जब हम प्राकृतिक संख्याओं के परिवार में शून्य (0) को भी शामिल कर लेते हैं, तो यह समूह ‘पूर्ण संख्या’ कहलाता है।

उदाहरण: 0, 1, 2, 3, 4, 5, …

तथ्य: शून्य की खोज के बाद ही संख्या पद्धति पूर्ण हुई, इसीलिए इन्हें पूर्ण संख्याएँ कहा जाता है।

3. पूर्णांक संख्याएँ (Integers)

पूर्णांकों में सभी धनात्मक संख्याएँ, ऋणात्मक संख्याएँ और शून्य शामिल होते हैं। इसे संख्या रेखा पर देखा जा सकता है।

धनात्मक पूर्णांक: 1, 2, 3, 4, …

ऋणात्मक पूर्णांक: -1, -2, -3, -4, …

शून्य: यह एक तटस्थ पूर्णांक है, जो न तो प्लस है और न ही माइनस।

4. सम और विषम संख्याएँ (Even and Odd Numbers)

सम संख्या (Even Numbers): ऐसी संख्याएँ जो 2 की टेबल में आती हैं या 2 से पूरी तरह कट जाती हैं। इनके अंत में 0, 2, 4, 6, या 8 होता है। उदाहरण: 2, 18, 54, 100, 1002।

विषम संख्या (Odd Numbers): ऐसी संख्याएँ जो 2 से भाग देने पर शेषफल छोड़ती हैं। इनके अंत में 1, 3, 5, 7, या 9 होता है। उदाहरण: 1, 15, 27, 33, 999।

5. अभाज्य और भाज्य संख्याएँ (Prime and Composite Numbers)

अभाज्य संख्या (Prime Numbers): ये वे संख्याएँ हैं जो बहुत ‘जिद्दी’ होती हैं, ये सिर्फ 1 से या खुद अपने आप से कटती हैं। इनके केवल 2 गुणनखंड होते हैं। उदाहरण: 2, 3, 5, 7, 11, 13, 17, 19, 23।

विशेष: 2 एकमात्र सम अभाज्य संख्या है। 1 से 100 तक कुल 25 अभाज्य संख्याएँ होती हैं।

भाज्य संख्या (Composite Numbers): ऐसी संख्याएँ जो 1 और स्वयं के अलावा किसी और तीसरी संख्या से भी कट जाएं। उदाहरण: 4, 6, 8, 9, 10, 12।

विशेष: 1 न तो अभाज्य है और न ही भाज्य।

6. परिमेय और अपरिमेय संख्याएँ (Rational and Irrational Numbers)

परिमेय संख्या (Rational Numbers): जिन्हें हम p/q (अंश/हर) के रूप में लिख सकते हैं। यहाँ हर (नीचे वाला अंक) कभी 0 नहीं होना चाहिए। उदाहरण: 1/2, 4, 0, -5/3।

अपरिमेय संख्या (Irrational Numbers): जिन्हें p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता। इनका दशमलव रूप कभी खत्म नहीं होता। उदाहरण: √2, √3, π (पाई)।

7. विभाज्यता के अचूक नियम (Divisibility Rules)

परीक्षा में समय बचाने के लिए ये नियम रट लेना जरूरी है:

  • 2 का नियम: इकाई अंक सम होना चाहिए।
  • 3 का नियम: संख्या के अंकों को जोड़ो, अगर जोड़ 3 से कटता है तो पूरी संख्या कटेगी।
  • 4 का नियम: आखिरी के दो अंक 4 से कटने चाहिए।
  • 5 का नियम: आखिरी अंक 0 या 5 हो।
  • 6 का नियम: जो 2 और 3 दोनों से कटे।
  • 8 का नियम: आखिरी के तीन अंक 8 से कटने चाहिए।
  • 9 का नियम: अंकों का जोड़ 9 से कटना चाहिए।
  • 11 का नियम: विषम और सम स्थान के अंकों के योग का अंतर 0 या 11 हो।

8. स्थानीय मान और अंकित मान (Local and Face Value)

अंकित मान (Face Value): अंक का अपना असली चेहरा। जैसे 943 में 4 का अंकित मान 4 ही रहेगा।

स्थानीय मान (Place Value): अंक जिस कुर्सी (स्थान) पर बैठा है। 943 में 4 दहाई पर है, तो 4 × 10 = 40।

9. महत्वपूर्ण गणितीय सूत्र (Basic Formulas)

1. प्रथम n प्राकृतिक संख्याओं का योग = [n(n + 1)] / 2

2. प्रथम n सम संख्याओं का योग = n(n + 1)

3. प्रथम n विषम संख्याओं का योग = n²

4. प्रथम n प्राकृतिक संख्याओं के वर्गों का योग = [n(n + 1)(2n + 1)] / 6

5. भाज्य = (भाजक × भागफल) + शेषफल


भाग 2: अभ्यास प्रश्न और विस्तृत समाधान (30% व्यावहारिक भाग)

प्रश्न 1: 1 से लेकर 50 तक की सभी संख्याओं का योग क्या होगा?

उत्तर: 1275

समाधान: यहाँ n = 50 है। सूत्र [n(n + 1)] / 2 के अनुसार: [50 × (50 + 1)] / 2 = 25 × 51 = 1275।

प्रश्न 2: 1 से 100 के बीच कुल कितनी अभाज्य संख्याएँ (Prime Numbers) होती हैं?

उत्तर: 25

समाधान: यह एक तथ्यात्मक प्रश्न है। 1-50 तक 15 और 51-100 तक 10 अभाज्य संख्याएँ होती हैं। कुल = 25।

प्रश्न 3: संख्या 8543 में 5 के स्थानीय मान और अंकित मान में कितना अंतर है?

उत्तर: 495

समाधान: 5 का स्थानीय मान = 500 (सैकड़ा स्थान), 5 का अंकित मान = 5। अंतर = 500 – 5 = 495।

प्रश्न 4: किसी संख्या को 121 से भाग देने पर 25 शेष बचता है, उसी संख्या को 11 से भाग देने पर क्या शेष बचेगा?

उत्तर: 3

समाधान: पुराने शेषफल (25) को नए भाजक (11) से भाग दें। 25 ÷ 11 = 11 × 2 + शेषफल 3। उत्तर 3 है।

प्रश्न 5: क्या संख्या 48327, 3 से पूरी तरह विभाजित है?

उत्तर: हाँ

समाधान: अंकों को जोड़ें: 4+8+3+2+7 = 24। चूँकि 24, 3 से कटता है, इसलिए पूरी संख्या भी 3 से कटेगी।

प्रश्न 6: प्रथम 10 सम संख्याओं का योग ज्ञात करें।

उत्तर: 110

समाधान: सूत्र n(n + 1) के अनुसार: 10 × (10 + 1) = 110।

प्रश्न 7: सबसे छोटी अभाज्य संख्या कौन सी है?

उत्तर: 2

समाधान: 1 अभाज्य नहीं है। 2 पहली संख्या है जिसके केवल 2 गुणनखंड हैं।

प्रश्न 8: प्रथम 12 विषम संख्याओं का योग क्या होगा?

उत्तर: 144

समाधान: सूत्र n² के अनुसार: 12 × 12 = 144।

प्रश्न 9: संख्या 120 के कुल कितने गुणनखंड (Factors) हैं?

उत्तर: 16

समाधान: 120 = 2³ × 3¹ × 5¹। गुणनखंडों की संख्या = (3+1)(1+1)(1+1) = 4 × 2 × 2 = 16।

प्रश्न 10: 100! (फ़ैक्टोरियल) के अंत में कितने शून्य (Zeros) होंगे?

उत्तर: 24

समाधान: 100/5 = 20; 20/5 = 4। कुल शून्य = 20 + 4 = 24।

प्रश्न 11: दो अंकों की सबसे छोटी अभाज्य संख्या कौन सी है?

उत्तर: 11

प्रश्न 12: क्या 0 एक परिमेय संख्या है?

उत्तर: हाँ

समाधान: 0 को 0/1 के रूप में लिखा जा सकता है, जो p/q का रूप है।

प्रश्न 13: 45678 में 6 का स्थानीय मान क्या है?

उत्तर: 600

प्रश्न 14: वह कौन सी संख्या है जो न तो अभाज्य है और न ही भाज्य?

उत्तर: 1

प्रश्न 15: 1 से 20 तक की अभाज्य संख्याओं का योग क्या है?

उत्तर: 77

समाधान: 2+3+5+7+11+13+17+19 = 77।

प्रश्न 16: संख्या 243^57 में इकाई का अंक क्या होगा?

उत्तर: 3

समाधान: घात 57 को 4 से भाग दें, शेष 1 बचेगा। 3^1 = 3।

प्रश्न 17: (25+18+10) का इकाई अंक क्या है?

उत्तर: 3

समाधान: इकाई अंक जोड़ें: 5+8+0 = 13। इकाई अंक 3 है।

प्रश्न 18: तीन अंकों की सबसे छोटी अभाज्य संख्या कौन सी है?

उत्तर: 101

प्रश्न 19: 0.125 को भिन्न (Fraction) में बदलें।

उत्तर: 1/8

समाधान: 125/1000 = 1/8।

प्रश्न 20: 500 तक कितनी संख्याएँ 15 से पूरी तरह कटती हैं?

उत्तर: 33

समाधान: 500 ÷ 15 = 33.33। भागफल 33 है।

— यहाँ संख्या पद्धति का संपूर्ण ज्ञान समाप्त होता है। निरंतर अभ्यास ही गणित में सफलता का एकमात्र मार्ग है। —

अध्याय 1: BODMAS नियम (सरलीकरण)

BODMAS नियम: गणितीय संक्रियाओं का संपूर्ण मार्गदर्शिका

गणित की दुनिया में अंकों को जोड़ना या घटाना जितना सरल दिखता है, समीकरणों को हल करना उतना ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि आपको एक ही पंक्ति में जोड़, घटाव, गुणा और भाग दे दिया जाए, तो आप भ्रमित हो सकते हैं कि शुरुआत कहाँ से करें। इसी भ्रम को दूर करने के लिए गणितज्ञों ने BODMAS का नियम बनाया है। यह नियम किसी भी प्रतियोगी परीक्षा जैसे SSC, Banking, Railway, या UPSC के CSAT पेपर के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है।


भाग 1: BODMAS का विस्तृत अर्थ और परिभाषा

BODMAS एक संक्षिप्त रूप (Acronym) है जो गणना के क्रम को निर्धारित करता है। आइए इसके प्रत्येक अक्षर का गहन विश्लेषण करें:

1. B – Brackets (कोष्ठक)

जब किसी प्रश्न में कोष्ठक होते हैं, तो सबसे पहले उनके अंदर की संख्याओं को हल किया जाता है। कोष्ठकों को हल करने का भी एक निश्चित क्रम होता है:

  • रेखा कोष्ठक (Bar Bracket —): इसे ‘विनकुलम’ भी कहते हैं। यदि किसी संख्या के ऊपर बार लगा हो, तो सबसे पहले वही हल होगा।
  • छोटा कोष्ठक (Small Bracket) ( ): रेखा कोष्ठक के बाद इसकी बारी आती है।
  • मंझला कोष्ठक (Curly Bracket) { }: छोटे कोष्ठक को हल करने के बाद इसके अंदर का हिस्सा सुलझाया जाता है।
  • बड़ा कोष्ठक (Square Bracket) [ ]: यह सबसे अंत में हल होने वाला कोष्ठक है।

2. O – Of / Order (का / घात)

B के ठीक बाद O का नंबर आता है। इसके दो मुख्य उपयोग हैं:

  • Of (का): सरल शब्दों में इसका अर्थ गुणा ही होता है, लेकिन नियम के अनुसार इसे भाग से पहले किया जाता है। जैसे: 100 का 20%।
  • Order (घात): यहाँ वर्ग (Square), घन (Cube), और वर्गमूल (Square Root) जैसी घातांक वाली गणनाएं की जाती हैं। जैसे 4² या √25।

3. D – Division (भाग) और M – Multiplication (गुणा)

नियम में भाग (D) पहले और गुणा (M) बाद में आता है। हालाँकि, गणित के आधुनिक सिद्धांतों के अनुसार इन दोनों की प्राथमिकता समान है, इसलिए इन्हें बाएँ से दाएँ (Left to Right) के क्रम में हल करना चाहिए। प्रतियोगी परीक्षाओं में हमेशा पहले भाग देने की सलाह दी जाती है ताकि संख्याएँ छोटी हो जाएं।

4. A – Addition (जोड़) और S – Subtraction (घटाव)

यह गणना का अंतिम चरण है। संख्याओं को जोड़ने के बाद अंत में घटाने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।


भाग 2: महत्वपूर्ण सारणी (Priority Table)

क्रम संकेत क्रिया
1 [ { ( — ) } ] कोष्ठक हल करना
2 Of, x², √ का / घात / वर्गमूल
3 ÷ भाग देना
4 × गुणा करना
5 + जोड़ना
6 घटाना

भाग 3: विस्तृत अभ्यास प्रश्न (Solved Examples)

उदाहरण 1: 50 + [20 – {10 – (8 – 5)}] का मान ज्ञात करें।

समाधान स्टेप-बाय-स्टेप:

Step 1: छोटा कोष्ठक हल करें: (8 – 5) = 3.

Step 2: मंझला कोष्ठक हल करें: {10 – 3} = 7.

Step 3: बड़ा कोष्ठक हल करें: [20 – 7] = 13.

Step 4: अंत में जोड़ें: 50 + 13 = 63.

उत्तर: 63

उदाहरण 2: 1/4 ÷ 1/4 का 1/4 × 1/4 का मान क्या होगा?

समाधान: यहाँ ‘का’ (Of) भाग से पहले हल होगा।

Step 1: ‘का’ हल करें: 1/4 का 1/4 = 1/16.

Step 2: अब भाग: 1/4 ÷ 1/16 = 1/4 × 16/1 = 4.

Step 3: अंत में गुणा: 4 × 1/4 = 1.

उत्तर: 1

उदाहरण 3: 100 ÷ 5 × 4 + (20 ÷ 4) – 5

समाधान:

Step 1: कोष्ठक: 20 ÷ 4 = 5. (समीकरण: 100 ÷ 5 × 4 + 5 – 5)

Step 2: भाग: 100 ÷ 5 = 20. (समीकरण: 20 × 4 + 5 – 5)

Step 3: गुणा: 20 × 4 = 80. (समीकरण: 80 + 5 – 5)

Step 4: जोड़ और घटाव: 80 + 5 = 85, 85 – 5 = 80.

उत्तर: 80

उदाहरण 4: क्या होगा यदि बार (Bar) कोष्ठक दिया हो? 15 – [10 – {5 – (4 – 1)}] (माना 4-1 पर बार है)

समाधान:

Step 1: बार कोष्ठक हल करें: 4 – 1 = 3.

Step 2: छोटा कोष्ठक: 5 – 3 = 2.

Step 3: मंझला कोष्ठक: 10 – 2 = 8.

Step 4: अंत में घटाव: 15 – 8 = 7.

उत्तर: 7


भाग 4: सामान्य गलतियाँ और उनसे बचने के उपाय

BODMAS हल करते समय अक्सर छात्र निम्नलिखित गलतियाँ करते हैं:

  • चिह्नों की अनदेखी: कोष्ठक के बाहर यदि (-) का चिह्न है, तो कोष्ठक खोलते समय अंदर के सभी चिह्न बदल जाते हैं। जैसे: -(5 – 2) = -5 + 2.
  • बाएँ से दाएँ का नियम भूलना: यदि प्रश्न में केवल गुणा और भाग ही बचे हैं, तो हमेशा बाएँ से शुरू करें।
  • ‘Of’ को साधारण गुणा समझना: याद रखें, ‘Of’ का गुणा भाग से पहले होगा, जबकि साधारण गुणा (x) भाग के बाद।

भाग 5: स्वयं के लिए अभ्यास (Self Practice)

नीचे दिए गए प्रश्नों को स्वयं हल करें और उत्तर की जांच करें:

  1. 48 ÷ 12 × (9 – 8) का 4 = ?
  2. 1800 ÷ 10 {12 + (6 + 8 – 2)} = ?
  3. 25 का 4/5 ÷ 2 + 10 = ?
  4. [{(10 + 5) ÷ 3} × 5] – 20 = ?
  5. 0.4 × 0.4 ÷ 0.4 + 0.4 = ?

— यह मार्गदर्शिका आपकी गणितीय समझ को गहरा करने के लिए बनाई गई है। निरंतर अभ्यास ही सफलता की एकमात्र कुंजी है। —